1 हैं इश्वर और 1 है श्रृष्टि,
1 है ध्रति और 1 हैं अम्बर
1 है दिवस है और 1 हैं साँझ
1 है मन और 1 है तन
1 है जीवन,और 1 है प्रण
लेकिन क्यों हैं ये अपेक्षाएं इतनी जिनको समझ सके हम अबतक नहीं
करें जो भी हो संयम का shyam
पहुंचें वहां जहाँ रहे सदा श्रीश्तिकर्ता का....avlamb
NIVEDITA SINGH
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